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Thursday, 12 February 2015
अंजान राहे
अंजान राहे मुझे क्यों बुलाती हैं
मेरा कोई साथी नहीं
जो मेरा हाथ थाम ले
जिसके साथ सफ़र आसानी से गुजर जाए
Saturday, 3 January 2015
मैने तुम्हे
मैने तुम्हे एक खत लिखा है
लिफाफे पे नाम तुम्हारा लिखा है
पर काग़ज़ कोरा ही रखा है
उसपे बसी है मेरे दिल की धड़कन
दिल से लगा लेना
Saturday, 29 November 2014
ज़िंदगी
जब ज़िंदगी ने दस्तक दी
हम ज़िंदगी से किनारा कर चुके थे
अपने हो गये थे .खफा और बेगाने हो गये थे
यह कैसा था हुआ सितम
सारे पेमाने टूट कर चूर हो गये थे
Monday, 20 October 2014
जब कोई पत्ता
जब कोई पत्ता पेड़ से जुदा होता है
आँख से कोई आँसू निकलता है
शबनम भी रोती है फूलों पे
एक अजीब सा गम
चारो ओर छाया है
Thursday, 17 April 2014
दरवाजे पे
मैने दरवाजे पे अपने
कब यह लिखा था
दस्तक मत देना
आवाज़ भी ना देना
मैने तो तुमसे यही कहा था
दरवाज़ा खुला रहेगा
बस तुम्हारा इंतेज़ार है
Tuesday, 4 February 2014
यह किसने जाना है
यह किसने जाना है
जान ना पाया है कोई
हर कोई अंजाना है
आया है तू कहा से
कहाँ तुझे अब जाना है
Friday, 22 November 2013
मैं एक सी.डी
मैं एक सी.डी
मैं एक सी.डी और मेरी बहिन एक डी. वी. डी
जब से मार्केट में आईं हैं
सुना है तुमने खुशी बहुत मनाई है
हम हैं सुनहरी और रूपहली
जब गोल गोल हम चलतीं हैं
तो कभी जानकारी तो
कभी फिल्में और कभी
गानों की ध्वनि हम से निकलती है
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